सिगमंड फ्रायड (Sigmund Freud)

                      

सिगमंड फ्रायड का जन्म 6 मई 1856 को ऑस्ट्रिया में हुआ था। वे एक सामान्य परिवार से संबंध रखते थे। उनके पिता- जैकब फ्रायड और उनकी माता- अमलिया फ्रायड थे। वह अपने युवा जीवन से असाधारण रूप से मुक्त थे  क्योंकि उन्हें अपने प्रियजनों द्वारा बहुत अधिक प्यार और अवसर दिया गया था।

सिगमंड फ्रायड  के अनुसार "व्यक्ति का विस्मृत मस्तिष्क (संज्ञानात्मक, अर्ध-संज्ञानात्मक) मन की एक विस्तृत श्रृंखला को नियंत्रित करता है और वह इसे मुख्य स्थान देता है।" अत: एक व्यक्ति का अचेतन मस्तिष्क ही सर्वश्रेष्ठ है।

फ्रायड का मनोविश्लेषण सिद्धांत (Freud's psychoanalytic theory) :-

जैसा कि फ्रायड ने बताया है कि, चरित्र का शक्तिशाली पक्ष तीन चरणों में आकार ले लेता है

  1. इद (Id )  जन्मजात होती है। फ्रायड इसे व्यक्तित्व का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं
  2. अहम् (ego)
  3. परा-अहम् (super ego)

1. इद (Id ):-  

Libido- (काम शक्ति) व्यवहार में परिवर्तन आ जाता है। 

इसे सुखवादी सिद्धान्त कहते हैं। इसकी प्रवृत्ति अचेतन होती है अर्थात् इससे कोई सीधा सम्बन्ध नहीं है। इसको इच्छाओं की जननी भी कहते हैं। इद (Id ) के स्तर पर व्यक्ति इन्द्रिय द्वारा जनित सुखों की खोज करता है।
इद को अतृप्त इच्छाओं का भण्डार भी कहते हैं। इच्छा पूर्ति के द्वारा व्यक्ति को सुख की प्राप्ति‍ होती है। यह पूर्णतः अचेतन में कार्य करता है:-

1. यह हर मनोदैहिक शक्ति का आवश्यक स्रोत है।
2. काम प्रवृत्ति की मनोवैज्ञानिक शक्तियों की भण्डारण सुविधा है।
3. वास्तविक मानसिक वास्तविकता।
4. यह प्रमस्तिष्क का सूक्ष्म भाग है। जिसमें आन्तरिक प्रवृत्तियाँ, आवश्यक प्रवृत्तियाँ, इच्छाएँ निहित होती हैं।

2. अहम् (ego):-

यह एक व्यक्ति को अच्छे और बुरे के प्रति जागरूक बनाता है। तत्पश्चात् अन्तरात्मा को वास्तविक जगत का मानक (संज्ञानात्मक) भी कहा जाता है। 

1. इदम् की अवैध क्रियाओं को नियंत्रित करने के लिए अहम् एक सैनिक के रूप में कार्य करता है। 
2. इदम् की लालसा और वास्तविक दुनिया के अनुरोधो के बीच समायोजन होता है।
3. अहम्—चेतन व अचेतन, दोनों होता है।
4. इसकी प्रवृत्ति तार्किक होती है।

3. पराअहम् (super ego):-

यह आदर्शवादी सिद्धान्त पर आधारित। यह मन का वह भाग है, जिसे अन्तरात्मा कहा गया है। यह व्यक्तित्व का सर्वोच्च स्तर है एवं यह व्यक्ति में नैतिकता एवं आदर्श का विकास करता है। इसे आदर्शवादी सिद्धान्त भी कहते हैं । यह इदम् की अनुचित अभिव्यक्तियों को नियंत्रित रखने का प्रयास करता है। फ्रायड़ परा-अहम् को अहम् आदर्श (Ego Ideal) मानते हैं।

1. यह अहम् पर नियंत्रण रखता है।
2. यह इदम् पर नियंत्रण रखता है।
3. परम् - अहम् व्यक्ति के व्यक्तित्व का नैतिक शास्त्र होता है। यह एक आदर्श स्वत्व और अंतरात्मा का प्रतिनिधि होता है।

सिगमंड फ्रायड ने व्यक्तित्व सम्बंधी विचारों को मनोलैंगिक विकास का सिद्धांत भी कहा है। फ्रायड ने इसे पांच अवस्थाओं में बांटा है:-

 

क्रम सं.

अवस्था

वर्ष

क्रियाएं

1.

मौखिक अवस्था (Oral stage)

जन्म से 0 वर्ष

बच्चा बड़बड़ाना या Bubbling करना शुरू

2.

गुदा अवस्था (Anal stage)

2 से 3 वर्ष

Toilet Training Stage (शौचालय प्रशिक्षण चरण)

3.

लैंगिक अवस्था (Phallic stage)

4 से 5 वर्ष

Super Ego

समाज की मान्यताओं, संस्कारों एवं आदर्शों से संबंधित है।

I.

इलेक्ट्रा कॉम्प्लेक्स:

पिता और पुत्री के बीच शारीरिक आकर्षण होता है।

II.

ओडिपस कॉम्प्लेक्स:

पुत्र और माता के बीच शारीरिक आकर्षण होता है।

4.

सुषुप्त अवस्था (Latency stage)

6 से 12 वर्ष

बच्चे अलग-अलग समूह बनाकर कर खेलना शुरू कर देते हैं। लड़के- लड़कियां अपना-अपना समूह बनाकर खेलते हैं।

5.

जननिक अवस्था (Genital stage)

12 वर्ष से अधिक 

Opposite sex की आकर्षण होने लगता है।लड़के-लड़कियां एक-दूसरे की ओर आकर्षित होने लगते हैं। 

 

सिगमंड फ्रायड के अनुसार बच्चे स्वयं को बचाने के लिये कई प्रक्रियाओं को अपनाते हैं:-

  • विस्थापन (Displacement)
  • इनकार (Denial)
  • दमन (Repression) -> बेहोश रहना - चिंता से बचने के लिये 
  • उच्च बनने की क्रिया (Sublimation)
  • प्रक्षेपण (Projection)
  • बौद्धिक रूप में (Intellectualization)
  • युक्तिकरण (Rationalization) -> अपना आरोप दूसरों पर थोपना 
  • वापसी (Regression)
  • प्रतिक्रिया गठन (Reaction formation)
सिगमंड फ्रायड ने मन की 3 अवस्थाएँ बताई हैं:-
  1. जागरूक मन (Conscious mind) -> 8% कार्य करता है। 
  2. अवचेतन मन (Pre-conscious or Subconscious mind) -> 2% कार्य करता है। 
  3. अचेतन मन (Unconscious mind) -> 90% कार्य करता है। 

 निष्कर्ष (Conclusion)-

सिगमंड फ्रायड के सभी विचारों को एक महत्वपूर्ण विषयवस्तु के रूप में देखा जाता है, लेकिन फ्रायड के अनुसार, एक व्यक्ति का विस्मृत मस्तिष्क एक विस्तृत श्रृंखला (संज्ञानात्मक, अर्ध-संज्ञानात्मक) मन को नियंत्रित करता है और वह इसे मुख्य स्थान देता है। इसलिए, किसी व्यक्ति का अचेतन मन कमाल का होता है।


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