पॉवलोव का क्लासिकल अनुबंधन सिद्धांत (classical conditioning theory of Pavlov’s )

" पॉवलोव ने 1904 में मेडिसिन के लिए नोबेल पुरस्कार जीता था, ये रुस के पहले नोबेल पुरस्कार विजेता थे। "
|
Classical conditioning की व्याख्या मुख्य चार सम्प्रत्ययों से की गयी है जो निम्न्लिखित हैं- 1.
स्वाभाविक उद्दीपक (UCS) 2.
स्वाभाविक अनुक्रिया (UCR) 3.
अस्वाभाविक उद्दीपक (US) 4.
अस्वाभाविक अनुक्रिया (UR) |
पॉवलोव का प्रयोग ( Pavlov’s Experiment )-
पॉवलोव ने अपने प्रयोग
के आधार
पर अनुक्रियाओं
को दो
भागों में
बांटा है
-
1. स्वाभाविक अनुक्रियाएँ, जो जन्मजात होती है।
2. अस्वाभाविक अनुक्रियाएँ, जो अर्जित व मनोवैज्ञानिक होती है।
- पॉवलोव का प्रयोग मुख में लार आने से सम्बन्धित है। मुँह में भोजन रखने पर ही लार ग्रथियाँ मुँह में लार छोड़ती हैं तथा यह जन्मजात, जैवकीय तथा हमेशा होने वाली क्रियाएँ हैं, इसलिए भोजन को स्वाभाविक उद्दीपक तथा लार आने को स्वाभाविक अनुक्रिया कहा जाता है।
पॉवलोव का कुत्ते पर प्रयोग ( Pavlov’s
Experiment on dog )
इवान
पॉवलोव ने अपना प्रयोग कुत्तों पर 1927 में किया।

पॉवलोव
ने अपने प्रयोग के दौरान कुत्ते को भोजन देते समय घण्टी की आवाज करना प्रारम्भ किया। अनेक बार ऐसा करने के बाद उसने केवल घण्टी की आवाज की तथा खाना नहीं दिया। ऐसा करने पर उन्होंने पाया कि केवल घण्टी की आवाज सुनकर ही कुत्ते के मुँह में लार आ गई।

1.
इससे पावलॉव ने यह पाया कि कुत्ते ने घंटी की आवाज को लार के आने से अनुबंधित कर लिया है।
2.
कुत्ते के मुँह से लार का गिरना (अनुक्रिया) स्वाभाविक उद्दीपक (भोजन) के प्रति हो रही थी। वहीं क्रिया अस्वाभाविक उद्दीपक (घण्टी) के प्रति होने लगी, इसी को हम अनुकूलित अनुबंधन का सिद्धान्त कहते हैं।
प्राचीन अनुबंधन की प्रक्रिया-
1. U. C. S. (भोजन) = U. C. R. (लार)
2. C S. ( घंटी) + U.C.S. ( भोजन)) = U. C. R. (लार)
3. C. S. (घंटी) = C. R. (लार)

- जीन प्याज़े का नैतिक विकास सिद्धान्त
- थार्नडाइक के सीखने के सिद्धान्त
- स्किनर का क्रिया प्रसूत सिद्धांत
- कोलबर्ग का नैतिक विकास का सिद्धान्त
निष्कर्ष
(Conclusion)
इससे
यह
निष्कर्ष निकलता है कि
यदि
लंबे
समय
तक
अस्वाभाविक उद्दीपन तथा
स्वभाविक उद्दीपन को एक
साथ
प्रस्तुत किया जाए तो
व्यक्ति अस्वाभाविक उद्दीपन के
प्रति भी स्वभाविक जैसी
अनुक्रिया करने लगता है।
इसे
ही
अनुकूलित अनुक्रिया या अनुबंधित अनुक्रिया कहते हैं।
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