थार्नडाइक के सीखने के सिद्धान्त (Thorndike's principles of learning)
थार्नडाइक के अनुसार अधिगम की प्रक्रिया में शारीरिक और मानसिक क्रियाओं का किसी न किसी रूप में सम्बन्ध होता है।
थार्नडाइक का उद्दीपन-अनुक्रिया सिद्धांत |Thorndike Improvement Reaction Hypothesis (S-R Hypothesis)
उद्दीपन-अनुक्रिया सिद्धांत Improvement Reaction Hypothesis (S-R Hypothesis) जिसके प्रतिपादक Edward L. Thorndike हैं। इसलिए इस सिद्धांत को थार्नडाइक का अधिगम सिद्धांत (Thorndike S-R Hypothesis of Learning) के नाम से भी जाना जाता है। थार्नडाइक के इस सिद्धान्त को बाल-मनोविज्ञान में मुख्य स्थान दिया जाता है।
थार्नडाइक के इस सिद्धान्त के अनुसार बालक तभी क्रियाशील होता है जब कोई वस्तु उसे उस कार्य को करने के लिए प्रेरित करे। थार्नडाइक के इन्हीं विचारों को ही उद्दीपन-अनुक्रिया सिद्धान्त (Improvement Reaction Hypothesis) के नाम से जाना जाता है। थार्नडाइक ने अपने इस सिद्धांत का प्रतिपादन वर्ष 1913 में प्रकाशित अपनी पुस्तक 'शिक्षा मनोविज्ञान' में किया।
- थार्नडाइक ने अपना पहला परीक्षण एक बिल्ली पर किया था। इस परीक्षण का मुख्य उद्देश्य अपने विचारों को एक तार्किक तरीका देना था। थार्नडाइक के इस सिद्धान्त का अनुसरण वर्तमान शिक्षा प्रणाली में छात्रों का संज्ञानात्मक विकास (cognitive development) करने हेतु किया जाता है।
- थार्नडाइक ने अपना परीक्षण एक बिल्ली पर किया एवं उस बिल्ली द्वारा की गई अनुक्रिया का मनोवैज्ञानिक विश्लेषण (psychological analysis) करके एक सिद्धांत प्रस्तुत किया जिसे उद्दीपन-अनुक्रिया सिद्धांत (S-R Hypothesis) के नाम से जाना जाता है। थार्नडाइक के इसी सिद्धांत को अधिगमकर्ता का सिद्धांत (Hypothesis of learning) भी कहते हैं।
- थार्नडाइक ने अपने परीक्षण में एक भूखी बिल्ली को पिंजरे में बंद कर दिया। उस पिंजरे की बनावट कुछ इस प्रकार थी कि उसके अंदर एक बटन लगाया गया था। जिसमें, जब बिल्ली का पैर पड़ता तो उस पिंजरे का दरवाजा खुल जाता। एक दिन थार्नडाइक ने उस पिंजरे के बाहर एक मछली रख दी, जिसकी सुगंध पाकर बिल्ली बाहर निकलने के लिए विभिन्न प्रयास करने लगी। जिसके कारण उसका पैर उस पिंजरे में लगे बटन में पड़ा जिससे पिंजरे का दरवाजा खुल गया और बिल्ली को पिंजरे के बाहर रखा भोजन (मछली) प्राप्त हो गया। थार्नडाइक यह परीक्षण बिल्ली पर कई बार किया।जिस कारण बिल्ली को यह आभास हो गया कि इस बटन के दबने से यह पिंजरा खुल जा रहा है और यह परीक्षण बार-बार करने पर बिल्ली कम समय में ही उस पिंजरे को खोलना सीख गयी।
- थार्नडाइक के अनुसार उद्दीपन ही अनुक्रिया को जन्म देता है, अर्थात बिल्ली के लिए उस मछली ने उद्दीपन का कार्य किया और उस मछली के कारण बिल्ली ने अपनी अनुक्रिया की। थार्नडाइक के अनुसार उद्दीपन की मौजूदगी में ही अनुक्रिया होती है और व्यक्ति सीखता है।
थार्नडाइक के अधिगम सिद्धांत के नियम (मुख्य एवं गौण) |Thorndike Law of learning hypothesis
थार्नडाइक ने अधिगम सिद्धान्त के मुख्य एवं गौण नियमों का वर्णन निम्न प्रकार से किया जो इस प्रकार हैं -
अधिगम सिद्धांत के मुख्य नियम (Principal rules of learning hypothesis)
● तत्परता का नियम (Law of availability)
● अभ्यास का नियम (law of activity)
● प्रभाव का नियम (Law of impact)
1. तत्परता का नियम - थार्नडाइक के अनुसार अधिगम (सीखना) हेतु मनुष्य में तत्परता अर्थात किसी कार्य को करने की उत्सुकता एवं जिज्ञासा होनी चाहिए। तभी वह कठिन कार्य को कम समय में सीख कर अपने दैनिक जीवन में उसका उपयोग कर सकता है।
2. अभ्यास का नियम - अभ्यास के इस नियम को उपयोग और अनुपयोग का नियम भी कहा जाता है। इस नियम के अनुसार व्यक्ति जब किसी कार्य को बार-बार करता है, तो उस कार्य को तीव्र गति से करने लगता है।यह नियम गणित और विज्ञान जैसे जटिल विषयों ज्यादा उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
3. प्रभाव का नियम - इस नियम के अनुसार छात्र को अधिगम हेतु किसी वस्तु या किसी व्यक्ति के संपर्क में आने की आवश्यकता होती है। जिस कारण वह उद्दीपन के प्रति अनुक्रिया करने के लिए उत्सुक होता है।
अधिगम सिद्धांत के गौण नियम (Optional principles of learning hypothesis)
● बहुप्रतिक्रिया का नियम (law of multi reaction)
● सहचर्य परिवर्तन का नियम (law of affiliated changes)
● आत्मीकरण का नियम (law of self-acknowledgment)
● आंशिक क्रिया का नियम (law of halfway action)
● मनोवृति का नियम (law of demeanor)
1. बहुप्रतिक्रिया का नियम- जब हम किसी नए कार्य को सीखते हैं तो विभिन्न प्रकार की प्रतिक्रियाएँ करते हैं। ये क्रियाएँ हम तब तक करते हैं, जब तक कि हमें सन्तोषजनक लक्ष्य प्राप्त नहीं हो जाता है।
2. सहचर्य परिवर्तन का नियम- थार्नडाइक के अनुसार छात्रों को किसी प्रकरण का अधिगम कराने हेतु उस प्रकरण से संबंधित वातावरण बनाना अति-आवश्यक है। जिस करण छात्र तीव्र और स्थायी रूप से अधिगम प्राप्त कर सकें। इसे सहचर्य परिवर्तन का नियम कहा जाता हैं।
3. आत्मीकरण का नियम - इस नियम के अनुसार छात्रों को अधिगम करवाने हेतु उनके पूर्व-ज्ञान का सहारा लेना चाहिए, अर्थात उन्हें ज्ञात से अज्ञात की ओर ले जाना चाहिए।
4. आंशिक क्रिया का नियम - इस नियम के अनुसार छात्रों को अंश से पूर्ण की ओर ले जाना चाहिए, अर्थात किसी प्रकरण को सम्पूर्ण रूप में ना पढ़ा कर छोटी-छोटी इकाईयों में पढ़ाया जाना चाहिए।
5. मनोवृति का नियम - थार्नडाइक के इस नियम के अनुसार अधिगम हेतु छात्रों में एक अलग दृष्टिकोण का होना अनिवार्य है। जो उनके दृष्टिकोण में आत्मविश्वास का निर्माण करें।
उद्दीपन-अनुक्रिया सिद्धांत की विशेषता (Attributes of Improvement Reaction Hypothesis)-
● उद्दीपन और अनुक्रिया के मध्य सामंजस्य एवं संतुलन स्थापित होना अधिगम है।
● प्रयास एवं भूल के नियम को मुख्य स्थान दिया जाता है, क्योंकि वह विभिन्न प्रतिक्रियाएं एवं भूल ही सही मार्ग के अधिगम की ओर आगे बढ़ाती हैं।
● अधिगम के इस सिद्धान्त के अनुसार अनुक्रिया हेतु उद्दीपन का होना अनिवार्य है, अर्थात अधिगम हेतु अधिगम के लिए प्रेरित करने वाली वस्तु का होना अनिवार्य है।
● त्रुटियों में निरंतर कमी होना अधिगम के कौशल में वृद्धि करता है।
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निष्कर्ष
थार्नडाइक का उद्दीपन-अनुक्रिया सिद्धान्त (Thorndike Improvement Reaction Hypothesis of Learning) वर्तमान की शिक्षण-अधिगम प्रणाली को प्रभावशाली बनाने हेतु अत्यंत उपयोगी है। थार्नडाइक के उद्दीपन-अनुक्रिया सिद्धांत का प्रयोग किसी भी आयु के छात्रों के लिए किया जा सकता है। इस सिद्धांत की सहायता से स्मृति को स्थायित्व प्रदान किया जा सकता है, क्योंकि यह सिद्धांत कर के सीखने पर बल देता है।
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